November 25, 2020

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कोरोना मरीजों के लिए एक अच्छी ख़बर, पहले स्टेज में कारगर साबित हुई प्लाज्मा थेरेपी

New Delhi: Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal interacts with Prime Minister Narendra Modi during a video conference meet chaired by the latter with the Chief Ministers of all the states to discuss the steps taken to conrtain the spread of Covid-19 across the country, in New Delhi on Apr 11, 2020. (Photo: IANS)

कोरोना वायरस दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. जिसके चलते यह माहमारी बीमारी पूरी दुनिया के लिए परेशानी बनी हुई है। इस महामारी बीमारी के बीच एक ऐसी ख़बर सामने आई है, जो इस बीमारी से थोड़ी रहत दे रही है. जी हाँ बीते शुक्रवार को दिल्ली के सीएम ‘अरविंद केजरीवाल’ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने इस महामारी का एक इलाज बताया है, जो कोरोना मरीज़ो पर असर कर रहा है। अरविंद केजरीवाल ने हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्लाज्मा उपचार के उपयोग के प्रारंभिक सकारात्मक परिणामों के बारे में बताया। अपने संबोधन में सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ‘हम बीते कुछ दिनों से लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में 4 रोगियों पर प्लाज्मा थेरेपी के उपचार करने की कोशिश कर रहे थे और अब उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।’

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोरोना के इस उपचार में 4 मरीजों को प्लाज्मा दिया गया था. और ये प्लाज्मा सही साबित हुआ है। इस प्लाज्मा से ठीक हुए 2 मरीज को जल्दी छुट्टी दी जायेगी, वही बाकिके 2 मरीज जैसे ही बेहतर होंगे होने भी घर भेज दिया जाएगा।

इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ”केंद्र सरकार की इजाजत के बाद हमने प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल किया था, हमने 4 मरीजों पर इसका ट्रायल किया था, उसके नतीजे काफी अच्छे आये हैं.” उन्होंने ये भी कहा कि ”हमने LNJP अस्पताल के 4 मरीज़ों पर प्लाज्मा का ट्रायल करके देखा, उसके अब तक के नतीजे उत्साहवर्धक हैं।” उन्होनें साथ ही साथ ये भी कहा कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा प्लाज्मा की जरूरत है। अरविंद केजरीवाल ने उन लोगों से अपील भी की है, जो कि कोरोना के संक्रमण से ठीक हो चुके हैं, कि वो आगे आएं और आके प्लाज्मा डोनेट करें।

अरविंद केजरीवाल ने ठीक हुए मरीजों से प्लाज्मा डोनेट करने की बात इस वजह से कि क्योंकि ठीक हुए मरीज के शरीर में कोरोना से लड़ने की क्षमता है। इस प्रक्रिया में ठीक हुए मरीजों के शरीर से खून लिया जाता है और उनके खून में मौजूद प्लाज्मा को जमा कर उसे कोरोना संक्रमित मरीजों को चढ़ाया जाता है।